Tuesday, April 12, 2011

Tere Naam by Anonymous



इक चादर को राहे महबूब में बिछा देना
मैं मर जाऊं तो उसे मेरा कफ़न बना देना
थोड़ी सी खाक उनके क़दमों की लेकर
इक आंसूं उनका मुझ पे गिरा देना
बहुत रोएगा मुझे देख देख कर एक शक्स 
इस लिए देर न लगाना, मुझे जल्दी दफना देना
लगाना एक पौधा मेरी खबर के सिरहाने 
मेरे यार के आंसूं उसको पिला देना
अगर बहुत रोए मेरी खबर पर आकर वो
तो निकालना मुझे वहाँ से और जला देना

1 comment:

  1. Ufff,

    ek pal keliye jaise jigar hee nikaal diya!!
    tere pyar mein, najaane kya kya lutaadiya!!!
    Zindagi mein nahin toh naa saheen!
    Marne ke baad hee sahin, tera saath dila diya!!!

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